टाटा जागृति यात्रा २००८ - संक्षिप्त ब्यौरा एवं उद्देश्य
२४ दिसंबर २००८ - ११ जनवरी २००९
टाटा जागृति यात्रा २००८ वार्षिक जागृति यात्रा की इस साल की कडी है जो कि भारत भर से, १८ से २५ वर्षीय ३५० मेधावी और उद्यमी युवाओं, और कुछ विदेशी युवाओं को, अट्ठारह दिन की राष्ट्रीय यात्रा के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों से मिलवाएगी जिन्होंने कडी विरुद्ध स्थितियों से लड-भिड कर भी (और लड-भिड कर ही) अपार सफ़लता अर्जित की है। उद्देश्य है भारत के एक आम युवा में इस भावना का संचार करना कि उद्यम के माध्यम से वो बदलाव लाया जा सकता है जो वो लाना चाहता है - चाहे वो कोई सामाजिक बदलाव हो अथवा कोई नया बिज़नेस आइडिया। ये यात्रा भावना से भरे युवाओं को सीधे उन दिग्गजों के सम्मुख ला खडा करेगी जिन्होने ज़मीनी सच्चाई से टक्कर ले कर कुछ ऐसा कर दिखाया है कि आज दुनिया उनका लोहा मानती है। तैयार रहिये युवा-भावना और अनुभव-जनित यथार्थवाद की बहस के लिये - शिक्षा के लिये - और इस सच्चाई के लिये कि गंभीर अनुभवों की शुरुवात ज्यादातर एक खतरनाक से महसूस होते जोश भरे निर्णय से होती है।
आज का युवा बाज़ार की चमक-दमक से इतना प्रभावित है कि वो उन लोगों को देख ही नहीं पाता जो वास्तव में हमारे आदर्श होने चाहिये। टाटा जागृति यात्रा २००८ ऐसे ही लोगों की कहानियों को खुद उनकी ही ज़बानी युवाओं तक पहुँचाने में प्रयासरत है। ये लोग ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण परिवेश में देश भर में बहुतायत में मौजूद हैं और इन से मुलाकात यात्रियों का जीवन बदलने में ही नहीं, बल्कि पलटने में भी सक्षम है। इन महान नायकों की कहानियाँ दिखाती हैं कि कैसे मेहनत से, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में लोगों ने महान सफलता पायी है। जागृति यात्रा मीडिया के माध्यम से अपने संदेश को कई उन युवाओं तक पहुँचाएगी जो कि इस यात्रा को दूर से देख रहे होंगे। हम हर साल ऐसे हज़ारो-हज़ार युवाओं तक उद्यम का संदेश पहुँचाएंगे - और संदेश होगा ये होगा कि तुम खुद वो बदलाव बन जाओ जिसे तुम लाना चाहते हो।
टाटा जागृति यात्रा २००८ - प्रभाव
टाटा जागृति यात्रा २००८ का ३५० यात्रियों पर तो सीधा गहरा असर पडेगा ही, साथ ही साथ, लगभग १५००० वो लोग भी प्रभावित होंगे जो कि हमें यात्री बनने हेतु संपर्क करेंगे। इसके अलावा विभिन्न नेटवर्कों के सहारे हम लगभग २५००० से ३०००० लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकेंगे।
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ६ बहसें होंगी जो कि टेलिविज़न पर भी प्रसारित होंगी। जानी-मानी टी.वी. हस्तियाँ इन बहसों का संचालन करेंगी। इन बहसों में हिस्सा लेने के लिये टीमों का चयन ३५० यात्रियों में से होगा; साथ ही, एक माननीयगणों का मंडल निर्णयकर्ता का रोल अदा करेगा। हम यात्रा के दौरान की जाने वाली इन बहसों के टी.वी. प्रसारण के लिये कई राष्ट्रीय चैनलों से सहयोग हेतु चर्चारत हैं।
जिन स्थानकों पर टाटा जागृति यात्रा रुकेगी, वहाँ के स्थानीय युवाओं को, स्थानीय प्रेस को और राष्ट्रीय प्रेस को हमसे जुड कर हमारे संदेश को प्रसारित करने का अवसर मिलेगा। हम आज के युग के सबसे शक्तिशाली मीडिया हथियार मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। मोबाइल ट्रेन से सीधी खबर भेजने के ज़रिये, एवं फ़ेसबुक, याहू, और हमसे जुडे ऐसे और इंटरनेट और मोबाइल नेट्वर्कों के ज़रिये संदेश के प्रसार में मदद मिलेगी। हमें पहले ही टाइम्स ऑफ़ इन्डिया, एन.डी,टी.वी., आई.ऎ.एन.एस., गल्फ़ न्यूज़ और देश-विदेश के तमाम अखबारों में ज़बर्दस्त क़वरेज़ मिला है। इसके अलावा हम स्थानीय और देशज भाषाओं के कई अखबारों से संधि प्रस्तावों पर बात कर रहे हैं। हम चाहते है कि हमारा संदेश देश के कोने कोने तक पहुँचे।
रेलयात्रा हमारा संदेश फैलाने का एक उपयुक्त और सशक्त माध्यम है। हम इस रेल यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेन्ट्री बनाने के लिये कुछ मुख्य प्रोड्क्शन कंपनियों से बात कर रहे हैं। ये डॉक्यूमेन्ट्री न सर्फ़ देश में बल्कि विदेशों तक भी पहुँचाई जाएगी। प्रसून जोशी, जिन्हें 'रंग दे बसंती' एवं 'तारे ज़मीं पर' जैसी फ़िल्मों के गीतों की रचना के लिये जाना जाता है, हमारी यात्रा की भावना को शब्दों में साकार कर चुके हैं - जागृति गीत के रूप में। कृपया www.jagritiyatra.com पर जा कर ज़रूर आनंद उठाएँ।
इस यात्रा के प्रारूप को १० साल पहले हुई 'आज़ाद भारत रेल यात्रा' के रूप में एक बार परखा भी जा चुका है। आ.भा.रे.या. भारत की आज़ादी के पचास सालों के जश्न के समय पूर्ण की गयी एक यात्रा थी जिसने नवयुवाओं को देश की सूरत पूरी संपूर्णता में मुहैया करवाई और उन्हें पचास सालों में हुई तरक्की से न सिर्फ़ अवगत ही करवाया, बल्कि उस तरक्की के बगल में फुट्टा रख कर उस मापने के लिये भी उकसाया; इस यात्रा ने बहुत से यात्रियों के जीवन की दिशा शायद सदा के लिये बदल दी थी। दस साल पहले करी गयी इस यात्रा पर एक पुस्तक भी लिखी जा चुकी है - 'India: a journey through a healing civilisation' | पुस्तक हार्पर-कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित की गयी है और जल्द ही इसका हिन्दी संस्करण भी उपलब्ध होगा।
टाटा जागृति यात्रा २००८ - प्रगति रपट
हम भारत की तमाम भूगौलिक, सांस्कृतिक, सामाजिक परतों में घुस कर सक्रिय भागीदारी बटोरने की मुहिम छेड चुके हैं। देश-विदेश के कॉलजों से लगातार यात्रा मे भाग लेने के लिये उत्सुक युवाओं की भीड उमडी चली आ रही है। जहाँ एक ओर राष्ट्रीय प्रेस हमारी मदद कर रही है, वहीं स्थानीय और देशज भाषा की प्रेस भी कंधे से कंधा जोड कर हमारे साथ इस पवित्र उद्देश्य हेतु कार्यरत है। प्रेस के अलावा हम रेडियो, एन्टरप्राइज विकास इकाइयों और कॉलेजों के उत्सवों में पहुँच कर अपनी बात ज़ोर-शोर से बता रहे है; आपको जान कर खुशी होगी कि आज का युवा सक्रिय है और इसका सबूत है - हमें मिला भरसक सहयोग और प्यार।
इस सहयोग और प्यार के सहारे टाटा जागृति यात्रा अधिकाधिक प्रभाव डालने के लिए प्रयासरत है। युवाओं के मध्य दिनोंदिन दिलोदिल बढती सजगता को सहारा देने और आगे बढाने के लिये आकर्षक पोस्टरों, मधुर रेडियो जिंगलों, काव्यात्मक तुकबंदियों आदि का सहारा लिया जा रहा है। सबसे बडी बात ये है कि हम भारत की जडों से भागीदारी चाहते हैं, न कि सिर्फ़ जाने माने शहरों से ही - इसलिये हमने आपको स्वयं तक पहुँचाने के लिये एक ऐसा द्वार खोला है जिसकी चाबी लगभग सबकी जेब में है - आपका मोबाइल फोन। फ़ोन उठाइये - ५४९९९ पर jagriti और उसके आगे अपना पता या फ़िर ई-मेल टाइप कीजिये; और हमें SMS कर दीजिये, बस।
जागृति यात्रा का हिस्सा बनने के लिये आपको एक चयन प्रक्रिया से गुज़रना होगा। सारी बात बस ये है कि आप कितने उद्यमशील हैं। विश्व के अलग अलग हिस्सों में बैठे काबिल और अत्यंत अनुभवशील निर्णायकगण अपने अपने कोण से आपके प्रार्थना-पत्रों पर विचार करेंगे। अपना प्रार्थना-पत्र आप हमें www.jagritiyatra.com पर जा कर भेज सकते हैं। इन तीन निर्णायकगणों के अलावा हमारे पास सहायकों के रूप में, इसी निर्णायक मंडल द्वार चुने गये कुछ विश्वसनीय और अपने अपने क्षेत्र में माहिर लोग होंगे जो कि यात्रियों को विभिन्न विषयों पर सलाह देंगे, मदद करेंगे और ज्येष्ट दोस्तों की तरह यात्रियों से घुलेंगे, मिलेंगे। हमनें कई आदर्श बनने लायक व्यक्तियों से यात्रा मे भाग लेने का आग्रह किया है और हम सहर्ष और गर्व-सहित ये बताना चाहते हैं कि डा. किरण बेदी, डा. राजेन्द्र पचौरी, मार्क टली, बंकर राय आदि ने हमारा आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया है।
टीम जागृति की एक झलक लें तो ये तीन भागों से मिल कर बनी संरचना है - संपूर्ण विश्व के चुने गये अनुभवशील व्यक्तियों से बना एक गैरकार्यकारी सलाहकार बोर्ड, भारत में स्थित पेशेवर कार्यकारी दल, और अत्यंत उत्साहित स्वयंसेवियों का एक विशाल समूह। इस समूह के मुख्य स्तंभ है अ.भा.रे.या. में भाग ले चुके यात्रीगण, जागृति यात्रा के लिये चुने गये यात्री, और कुछ भागीदार संस्थाएँ जैसे कि सी.आई.आई.ई. - आई.आई.एम. अहमदाबाद, स्कूल ऑफ़ बिज़ेनस एन्ड औन्तृप्रिन्यूर्शिप, एस्सेक्स महाविद्यालय, और आई.आई,टी. के तमाम स्नातक संगठन।
टाटा जागृति यात्रा एक बडे सपने की जननी सिद्ध होगी। इस बडे सपने का नाम है - जागृति औन्त्रप्राइज़ नेट्वर्क (जे.ई.एन.)। जे.ई.एन. संस्थाओं और संबधों का एक ऐसा ताना-बाना होगा जो कि मुख्यतः ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों मे व्यवसायों को प्रारंभ करने की सामर्थ्य पैदा करने के लिये सुचारु नियमबद्ध प्रशिक्षण मुहैया करवाएगा। इस नेट्वर्क की स्थापना और पहले कदम के लिए उत्तरी उ०प्र० स्थित गोरखपुर अथवा देवरिया ज़िले पर विचार हो रहा है। भविष्य में देश के विभिन्न प्रांतों मे ऐसी १० संस्थाओं की स्थापना अगले १० सालों में कर डालने का विचार है। जे.ई.एन का ब्यौरेवार मापचित्र और योजना प्रार्थना पर उपलब्ध करवाई जा सकती है।
टाटा जगृति यात्रा का आयोजन जागृति सेवा संस्थान, जो कि एक गैरसरकारी संस्था है, द्वारा किया जा रहा है। इस संस्था का लक्ष्य है युवाओं एवं महिलाओं को रोज़गार एवं व्यवसाय संबंधी प्रशिक्षण देना। टाटा जागृति यात्रा को किये गये सारे दान आयकर अधिनियम की धारा ८०जी के तहत करमुक्त हैं।
टाटा जगृति यात्रा २००८ - भागीदारी के अवसर
टाटा जागृति यात्रा २००८ व्यक्तिगत, विभिन्न व्यवसायिक निगमों से, एवं ट्रस्टों और संस्थाओं से, जोकि युवाओं के विकास में रुचि रखती हैं, सहयोग की अपील करती है। वार्षिक राष्ट्रीय रेलयात्रा की इस अभूतपूर्व संकल्पना में एक ज़ोरदार खिंचाव है जो कि बडे-छोटे सबको अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी और अपने कार्य की पहचान चिन्हित करने का इससे बेहतर मौका बिरले ही मिलता है। संस्थाओं एवं ट्रस्टों के लिये तो ये और भी मह्त्वपूर्ण है क्योंकि जागृति यात्रा दूरदृष्टि निहित प्रयासों के माधयम से कुछ वास्त्विक और लौकिक खडा करने का ज़बरदस्त मौका है।